Simon Commission भारत कब आया : पूरी जानकारी

Simon commission bharat kab aaya : नमस्कार दोस्तों, हम जब भी भारत के इतिहास के बारे पढ़ते हैं तो हम यह जानते हैं की भारतीय इतिहास मूल रूप से 3 हिस्सों में बंटा हुआ हैं। इन तीन हिस्सों में प्राचीन भारत का इतिहास, मध्यकालीन भारत का इतिहास और आधुनिक भारत का इतिहास प्रमुख हैं। 

इतिहास के पन्नो में सबसे ज्यादा प्रशिद्ध हैं भारत का आधुनिक इतिहास। इतिहास के इस भाग में हम भारत के स्वतंत्रता के बारे में पढ़ते हैं। देश की आजादी की लड़ाई के दोहरान हमने कई ऐसी घटनाएँ देखी हैं जिन्हें चाह कर भी नही भूल सकते हैं। 

ऐसी ही घटनाओं में से एक हैं साइमन आयोग। आधुनिक भारतीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू और जिसके बारे में हमें पढना चाहिए ताकि इतिहास को जान सके। हमारे इस लेख में आपको इसी के बारे में बताया जाएगा की साइमन आयोग क्या हैं ? साइमन आयोग भारत कब आया था ? 

साइमन आयोग क्या हैं ? 

देश की आजादी से पहले जब देश में आजादी के लिए आन्दोलन चल रहे थे उस दोहरान वायसराय लार्ड इरविन ने महात्मा गाँधी को बुलाकर उन्हें एक सुचना दी थी की भारत में वैधानिक सुधार लाने के लिए के एक आयोग की स्थापना की गई हैं और वो भारत आ रहा हैं। इस वैधानिक सुधार वाले आयोग का नाम था साइमन आयोग। 

इस आयोग की सबसे बड़ी बात यह थी की इस आयोग में सभी सदस्य अंग्रेज थे और वो भी ब्रिटेश से भारत आने वाले थे। तत्कालीन समय में महात्मा गांधी इस आयोग के भारत आने पर देश के नेताओं का अपमान माना और उसे वापस भेजने की बातों पर अड़े रहे। 

सभी भारतीय जो देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सा रहे थे उन्होंने समझा की यह भारतियों की आँखों में धुल जोखने की एक तरकीब हैं और हमारे जले पर नमक छिडकने का एक तरीका हैं। इसके साथ ही देश में हर तरफ इस कमीशन का विरोध होता रहा इसक बीच देश में इस आयोग की Entry हो गई। 

Simon Commission भारत कब आया :

Simon Commission भारत कब आया : पूरी जानकारी

देश में इसके विरोध के चलते के बावजूद साइमन आयोग बम्बई के बंदरगाह पर यह आयोग 3 फ़रवरी 1928 को भारत में प्रवेश कर इस बंदरगाह पर उतर गया। जैसे ही यह आयोग भारत आया तो इसके विरोध में भारत में हर जगह पर हड़ताले की गई और नारे लगाये गये। 

साइमन कमीशन आयोग के भारत में आने के विरोध में देश की राजनीतिक पार्टियों के इसका विरोध किया और साइमन गो बैक ( Simon Go Back ) के नारे लगाये। इस विरोध से कई प्रकार के विरोध के बावजूद यह आयोग भारत में आया। देश के नेताओं का इस आयोग के भारत में आने से कोई आपत्ति भी थी, आपत्ति थी तो बस इस बात से की इसमें कोई भी भारतीय नही बल्कि सभी अंग्रेज थे। 

Simon Commission को भारत क्यों भेजा गया ? 

यह बात देश की आजादी के लड़ाई के दोहरान की हैं। साइमन आयोग को भारत में भेजने के पीछे ब्रिटिश सरकार का मानना था की देश में वैधानिक सुधार की आवश्यकता हैं। भारत में लोग यह मांग कर रहे थे की देश में वैधानिक सुधार हो और इसी के चलते ब्रिटिश सरकार ने देश में साइमन आयोग को भेजा। 

साइमन आयोग को भेजने के पीछे मुख्य कारण तो कुछ और ही थे। ब्रिटिश सरकार ने यह कभी नहीं चाहा की देश में अमन और शांति बनी रहे। इसी के साथ भारत में कुछ साम्प्रदायिक दंगे और उनके आन्दोलन चरम पर थे जिसके कारण भारत में भारतियों की एकता नष्ट हो रही थी। 

साइमन आयोग के जरिये बिटिश सरकार देश में लोगो के बीच खाई खोद कर देश की सत्ता को पूरी तरीके से अपने हाथ में लेना चाहती थी। देश में आये इस आयोग का सबसे मुख्य विरोध का कारण था की इसमें सभी अंग्रेजी सदस्य थे और इसमें एक भी भारतीय नही था जो की इस आयोग और इसकी रिपोर्ट की पारदर्शिता पर एक सवालिया निशान लगा रहा था। 

इस आयोग का विरोध करने वाले भारतीयों का कहना था की भारत में भारत की स्तिथि को समझने के लिए इसमें भारतीयों का होना बेहद जरुरी हैं। इसमें भारतीयों के पास इस आयोग का विरोध करने के अलावा और भी कोई कारण नही था। इसके बाद इस आयोग के विरोध के देश भर में कई हड़ताले हुई और देश भर में दंगे हुए। 

साइमन आयोग के भारत आते ही इसका विरोध शुरू हो गया। इसके बाद साइमन आयोग के विरोध के अलावा भारतीयों के पास और कोई आप्शन नही था इसीलिए 1927 में मद्रास में कांग्रेस के वार्षिक सत्र में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए दृढ़ संकल्प किया गया था तथा यह निश्चय किया गया कि किसी भी हालत इस आयोग को स्वीकार नहीं किया जायेगा।

साइमन आयोग का विरोध

साल 1928 में जब साइमन आयोग भारत आया था तो इसका विरोध किया गया और इसको भारत से भेजने के लिए कई प्रकार की हड़ताले और प्रदर्शन किये गये। इस आयोग के लिए इसके आने पहले 1927 के मद्रास अधिवेशन में इसका विरोध किया गया और इस आयोग का पूर्ण बहिष्कार करने की बात की गई। 

साइमन आयोग के सम्बन्ध में मुख्य बिंदु

साइमन आयोग के बारे में कुछ मुख्य बिंदु जो परीक्षा की दृष्टि से बेहद जरुरी हैं। यह मुख्य बिंदु निम्न प्रकार से हैं – 

  • भारत में साइमन आयोग 1928 में आया था जिसके बाद उसे 10 साल तक भारत में रह कर उसे परिणाम बताने थे। उसके बाद 1938 में साइमन आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी। 
  • इस आयोग के भारत आने के बाद से ही भारत में इसका विरोध शुरू हो गया। इसी विरोध के चलते जब साइमन आयोग भारत आया तो उस समय उसमें लड़ाई में चोट लगने की वजह से लखनऊ में जवाहर लाल नेहरु और गोविद वल्लभ भाई पन्त की पूरी तारिक से पिता गया और इसमें लाला लाजपत राय के सिर में चोट लगने से मौत हो गई। 
  • यह आयोग चाहता था की भारत से बर्मा को अलग कर एक नया देश बना दिया जाए. 

निष्कर्ष

हमारे आसान भाषा में लिखे इस लेख में आपको Simon commission bharat kab aaya के बारे में बताया गया हैं. उम्मीद करते हैं की आपको यह लेख पसंद आया होगा.

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