Yada Yada Hi Dharmsya Hindi Meaning : यदा यदा ही धर्मस्य हिंदी मतलब।

Yada yada hi Dharmasya Hindi meaning नमस्कार दोस्तों, हम संस्कृत भाषा में अक्सर कई ऐसे श्लोक देखते और पढ़ते हैं जो कही न कही हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। ऐसे ही कई श्लोक हैं तो हम अक्सर मोटीवेट होने पर भी पढ़ते हैं। इन्ही श्लोको की सूची में से हम आपके लिए लेकर आये हैं एक ऐसा श्लोक जो आपके लिए बेहतर हो सकते हैं। 

इस श्लोक को आप यही कहते हैं यदा यदा ही धर्मस्य। आपको इस लेख के माध्यम से इसी के बारे में बताया जायेगा। इस श्लोक का मतलब और महत्त्व दोनों ही देखते और समझते हैं। हमारे सरल भाषा में लिखे इस लेख के अंत तक आप समझ जायेंगे इसका मतलब और महत्त्व। 

यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक का वर्णन :

Yada Yada Hi Dharmsya Hindi Meaning : यदा यदा ही धर्मस्य हिंदी मतलब।

हम जिस श्लोक की बात कर रहे हैं वो श्लोक गीता के अध्याय 4 का श्लोक 7 और 8 हैं। गीता हमारा सबसे पवित्र ग्रन्थ हैं और इसमें लिखी एक – एक बात और एक – एक शब्द वास्तविक हैं। इस श्लोक को पूरा कैसे कहे तो उसको भी आप देखे। यह पूरा श्लोक ऐसा होता हैं “यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत” यह वो पूरा श्लोक हैं। 

महभारत के युद्ध में जब युद्ध के दोहरान श्री कृष्ण अर्जुन की मदद के लिए आगे आये थे। अर्जुन ने युद्ध के दोहरान अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को युद्ध के लिए तैयार किया था परन्तु उन्होंने युद्ध में हिस्सा लेने से मना कर दिया था। तब ही भगवान अपनी बातों को इन श्लोको के जरिये कहा था। 

श्लोक का हिंदी अर्थ

इस पुरे श्लोक को इस तरह से समझते हैं। सबसे पहले हम इस श्लोक के बारे में समझते हैं उसके बाद इसका पूरा मतलब समझेंगे। यह पूरा श्लोक कुछ इस प्रकार हैं – 

“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। 

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।”

इसका अगर हम हिंदी में मतलब समझे तो यह कुछ इस प्रकार हैं – 

“यह श्लोक श्री गीता से लिया गया हैं और उसमे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की जब जब इस श्रृष्टि में या पृथ्वी पर धर्म की हानि होगी, और विनाश का कार्य हावी होगा और अधर्म के आगे धर्म जाएगा तो तब – तब में पृथ्वी पृथ्वी पर आता रहूँगा और पृथ्वी पर अवतार लेता रहता हूँ। ”

वही इसके आगे एक और श्लोक हैं जिसे श्री गीता से लिया गया हैं। इस श्लोक का मतलब भी आप जान सकते हैं। यह श्लोक इस प्रकार हैं – 

“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। 

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।”

इस श्लोक का अर्थ कुछ इस प्रकार हैं – 

“श्री गीता से लिया गया यह श्लोक भी काफी अच्छा हैं। इस श्लोक में भगवन श्री कृष्ण कहते हैं की सज्जनों और साधुओं की रक्षा करने के लिए पृथ्वी पर से पाप नष्ट करने करने लिए और पृथ्वी पर सभी दुर्जनों और पापियों के विनाश करने के लिए और अधर्म को हरा कर धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए में हर युग में और हर बार पृथ्वी पर अवतार लेता रहूँगा।”

इस श्लोक में लिखे शब्दों का अर्थ 

इस श्लोक में लिखे इन शब्दों और एक – एक शब्द का अर्थ अलग हैं और विशेष हैं। देखते हैं इन शब्दों का अर्थ – 

यदा यदा = इन शब्दों का अर्थ होता हैं जब – जब, 

हि = इसका अर्थ होता हैं वास्तव में, 

धर्मस्य = इस शब्द का अर्थ होता हैं धर्म की

ग्लानी भवति = इस श्लोक में इन शब्दों का अर्थ होता हैं हानि होती है, 

भारत = इस शब्द का अर्थ होता हैं हे! भारत,

 अभुत्थान्म = इस श्लोक का अर्थ होता हैं वृद्धि, 

अधर्मस्य = इस श्लोक का हिंदी अर्थ होता हैं अधर्म की, 

तदा = इसका शाब्दिक अर्थ होता हैं तब – तब,

आत्मानं = इस श्लोक में इस शब्द का अर्थ होता हैं अपने रूप को रचता हूँ

सृजामि = श्री गीता में लिखे इस श्लोक में इसका अर्थ होता हैं लोगो के सम्मुख प्रकट होता हूँ,

अहम = इस श्लोक के अंत में लिखे इस शब्द का अर्थ होता हैं मैं। 

श्लोक की व्याख्या 

श्रीमद् भागवत गीता में लिखे इस श्लोक का अर्थ अगर हम अपने पास की घटनाओं से निकाले तो इसका एक सामान्य सा अर्थ निकलता हैं। इस श्लोक में श्री कृष्ण के कहा हैं की जब जब इस पृथ्वी पर अधर्मी लोगो का दबदबा बढेगा यानी अधर्म का प्रचार होगा और धर्म पर अधर्म हावि होगा तो उसके समय भगवन श्री कृष्णा उन्ही अधर्मीओं को मिटाने और अधर्म को मिटाने इस पृथ्वी पर अलग – अलग रूपों में अवतार लेते रहेंगे। 

इस श्लोक के माध्यम से श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं की जैसे – जैसे इस पृथ्वी पर अधर्म का प्रचार होगा या जब – जब इस पृथ्वी पर धर्म पर संकट आएगा तब में यानी भगवान् श्री कृष्ण इस पृथ्वी पर अवतार लेते रहेंगे। 

इसके साथ वे आगे बताते हैं की जब – जब पृथ्वी पर सज्जनों के साथ दुर्व्यवहार होगा या साधुओं का अपमान होगा और उन सज्जनों को और साधुओ को परेशान करने वाले दुष्टों का विनाश करने करने के लिए भगवान श्री कृष्ण इस पृथ्वी पर अवतार लेते रहेंगे। 

श्री गीता से मिलने वाले सन्देश 

इस श्लोक के अलावा श्री गीता से मिलने वाले सन्देश और वो बाते जो हमारे लिए जरुरी हैं। यह वो है जिन्हें आप अपने जीवन में उतार सकते हैं – 

  • श्री गीता के अनुसार जीवन में जो भी आया हैं उसका अंत निस्चित हैं फिर चाहे वो मानव और या जीव जंतु या पेड पोधे इतियादी। 
  • एक दुसरे के प्रति दया भाव और मान सम्मान रखना चाहिए। 
  • किसी भी इंसान को अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि मनुष्य कई बार ऐसी स्तिथि आती हैं वो खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाता हैं। 
  • मनुष्य को पाप करने से बचना चाहिए। मनुष्य का मन चंचंल होता हैं जिससे हो सकता हैं की उसके हाथो कुछ पाप हो जाए तो इससे बचना चाहिए। 
  • इन्सान अपने जीवन में जो भी कर्म करता हैं चाहे तो अच्छे हो या बुरे उनका फल उन्ह जरुर मिलता हैं। यह कब मिलता हैं यह प्रकृति और उसके पाप और पुण्यो पर निर्भर करता हैं। 
  • मानव का हर जीवन में शरीर बदलता हैं परन्तु आत्मा एक ही रहती हैं इसलिए शरीर से नही बल्कि आत्मा से प्यार करना चाहिए।

निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से आपको Yada Yada hi Dharmasya Hindi Meaning के बारे में बताया गया हैं। उम्मीद करते हैं आपको यह लेख अच्छा लगा होगा और यह जानकारी पसंद आई होगी।

यह लेख भी पढ़े।

भारत का क्षेत्रफल कितना है? पूरी जानकारी

दुनिया का सबसे बेवकूफ प्रधानमंत्री कौन है।

क्रिकेट का मैदान कितना बड़ा होता है।

डी फार्मा क्या है? डी फार्मा कैसे करें? डी फार्मा के बारे में पूरी जानकारी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here